Muharram Kya Hai: मुहर्रम क्या है, इसे क्यों मनाते हैं, इसका इतिहास

Muharram Kya Hai: मुहर्रम क्या है, इसे क्यों मनाते हैं, इसका इतिहास

Muharram Kya Hai

मुहर्रम का परिचय: मुहर्रम मुसलमानों का पहला इस्लामिक महीना है जिसे मुस्लिम लोग नए साल के रूप में मनाते हैं और मुहर्रम बहुत गंभीर बलिदान उन लोगों की याद में मनाया जाता है जो कर्बला में शहीद हो गए थे और इमाम हसन इमाम हुसैन की शहादत पर शोक मनाते हैं और रोते हैं और पीटते हैं। लगभग 1430 वर्ष पूर्व नवी मुहम्मद सल्लल्लाहु वाले वसल्लम के पोते इमाम हसन इमाम हुसैन, आपके अनुयायी और इमाम हसन इमाम हुसैन कर्बला की जंग में शहीद हो गये थे। यह महीना बेहद गम और मातम का महीना है, जिसमें इस्लाम किसी भी तरह की बुराई की इजाजत नहीं देता।

मुहर्रम का इतिहास: मुहर्रम का विशेष इतिहास इस बात की गवाही देता है कि उस समय यजीद नामक राजा, जिसने मक्के शहर में लोगों पर अत्याचार किया, आध्यात्मिकता की पूजा-पाठ में बाधा डाली और उनका उल्लंघन किया। मुहर्रम की कहानी उस दिन की है जब इमाम हसन इमाम हुसैन का परिवार रेगिस्तान की चिलचिलाती गर्मी में भूख-प्यास से बेहाल थे, और उनका सारा सामान ख़त्म हो चुका था और तभी उन्होंने यज़ीद की सेना को आते देखा। इमाम हुसैन के पास केवल 72 सैनिक थे, जबकि यज़ीद के पास 80000 सेना तैयार खड़ी थी, लेकिन यह देखकर उनके अनुयायी न तो डरे, न ही युद्ध के मैदान से भागे, वे पूरी तरह आश्वस्त थे। उनके सभी साथी एक-एक करके मारे गए, आख़िर में अस्र के समय वह नमाज़ के लिए खड़े हुए, तभी यज़ीद ने उन्हें देखा और कहा कि यही उन्हें मारने का सही समय है, तब उन्होंने अपनी तलवार के एक वार से उनका सिर काट दिया। आज मुस्लिम समुदाय के लोग उन्हें याद करते हैं और उनकी भूख-प्यास को याद कर उन्हें श्रद्धांजलि देते हैं, इसमें हर मुसलमान, खासकर शिया समुदाय के लोग शामिल होते हैं।

Muharram Kya Hai: मुहर्रम क्या है, इसे क्यों मनाते हैं, इसका इतिहास

 

शिया मुस्लिम समुदाय: शिया समुदाय के लोग इसमें बहुत खुशी से भाग लेते हैं, जुलूस निकालते हैं, मातम मनाते हैं, कविताएं पढ़ते हैं, हसन हुसैन को याद करते हैं, उनके परिवार के सदस्यों को याद करते हैं, अपनी छाती पीटते हैं। खासकर ये काले कपड़े पहनते हैं, इन कपड़ों को इसी का ग़म प्रतीक माना जाता है। जगह-जगह मजलिसों का आयोजन किया जाता है। इसका आयोजन घरों में किया जाता है, महिलाएं, बूढ़े, बच्चे और जवान सभी मजलिस में जाते हैं। यह पूरे एक महीने तक चलता रहता है जब तक कि अगला चाँद नहीं निकल आता।

Muharram Kya Hai: मुहर्रम क्या है, इसे क्यों मनाते हैं, इसका इतिहास

 

सुन्नी मुस्लिम समुदाय: लेकिन सुन्नी मुस्लिम समुदाय के लोग इस तरह की मजलिस से दूर रहते हैं, मातम, रोना, काले कपड़े पहनना, शोक विलाप करना सुन्नी मुस्लिम समुदाय के लोग नहीं करते है। सुन्नी लोग पूजा करते हैं, रोज़ा रखते हैं, पापों से बचने की कोशिश करते हैं, गरीबों को दान करते हैं।

उपवास रोजे रखना: इस महीने मोहर्रम में नबी प्रोफेट मोहम्मद ने रोजा रखने की आज्ञा दी है और कहा है, मोहर्रम की 9 तारीख और 10 तारीख को रोजा रखा जाए या 10 और 11 को रखा जाए दो रोजे रखना अनिवार्य है।

पैगंबर मुहम्मद ने कहा कि रमजान के उपवास के बाद सबसे पवित्र महीना मुहर्रम का महीना है। उन दिनों यहूदी भी 10वें दिन का उपवास रखते थे। पैगंबर मुहम्मद ने कहा कि यहूदी भी मुहर्रम के 10वें दिन रोजा रखते हैं, इसलिए उन्होंने अपने मुस्लिम अनुयायियों से कहा कि वे दो रोजे रखें, क्योंकि यहूदी भी मोहर्रम के 10वें दिन रोजा रखते हैं, इसलिए आप उनसे अलग होकर दो रोजे रखें। आज भी मुस्लिम समुदाय के लोग दो रोजे रखते हैं, यह उनके पिछले पापों का प्रायश्चित होता है।

और पैगम्बर मोहम्मद ने मुहर्रम के महीने में रोजा रखने की फजीलत बताते हुए कहा है कि मैं अपने रब से उम्मीद करता हूं कि हमारे पिछले पापों को माफ कर दिया जाएगा।

 

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