Isro Chandrayaan: इसरो चंद्रयान-3 ने अपनी कक्षा बदली, सफल परीक्षण

Isro Chandrayaan: इसरो चंद्रयान-3 ने अपनी कक्षा बदली, सफल परीक्षण

Isro Chandrayaan

चंद्रयान- 3 मिशन: चंद्रयान-3 भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) द्वारा नियोजित तीसरा चंद्र अन्वेषण मिशन है। यह चंद्रमा पर भारतीय मिशनों की तीसरी शोध यात्रा थी। चंद्रयान-3 का उद्देश्य चंद्रमा का विस्तार से अध्ययन करना और विशेष रूप से चंद्रमा की सतह पर एक रोवर को सफलतापूर्वक उतारने का प्रयास करना है। यह मिशन चंद्रयान-2 के बाद संचालित किया जाना था, जिससे चंद्रयान-2 के उद्देश्यों को पूरा करने में दिक्कतें आ रही थीं।

इसरो को अंतरिक्ष से जानकारी मिली कि चंद्रयान-3 अपनी धुरी पर घूमता हुआ अपनी कक्षा में पहुंच गया। और वहां अपना सारा डेटा एकत्र करना शुरू कर दिया, वहां से जानकारी देने के बाद इसरो की टीम ने इसकी जांच और विश्लेषण शुरू कर दिया। यह अपनी दूरी तक घूम रहा है और इसके लगभग 3,00000 किलोमीटर तक चलने की उम्मीद है, जो चंद्रमा तक पहुंच सकेगा और वहां की तस्वीरें ले सकेगा। इसरो द्वारा अंतरिक्ष की सभी जानकारी एकत्रित की जा रही है, हर दिन लगातार काम किया जा रहा है, हर दिन नई तकनीकी और जानकारी का विश्लेषण किया जा रहा है।

चंद्रयान-3 का सफल परीक्षण: चांद से मिलने गया अपना यान उम्मीद के मुताबिक आगे बढ़ रहा है। चंद्रयान-3 की कक्षा एक बार फिर बदली गई है। इसरो ने 17 जुलाई 2023 को एक बार फिर कक्षा बदलने की प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरा कर चंद्रयान-3 को अगली और बड़ी कक्षा में भेज दिया है। इसरो ने कहा यान अब 41603 किलोमीटर x 226 किलोमीटर की कक्षा में है। इसका मतलब यह है कि चंद्रयान-3 अब जिस कक्षा में है वह पृथ्वी से सबसे नजदीक होने पर 226 किलोमीटर और पृथ्वी से सबसे दूर होने पर 41603 किलोमीटर की दूरी पर है। मंगलवार को दोपहर के 2:00 से 3:00 के बीच कक्षा फिर बदली जाएगी। चंद्रयान-3 को प्रक्षेपण के बाद जिस कक्षा में डाला गया था वह पृथ्वी से सबसे नजदीक होने पर 170 किलोमीटर और पृथ्वी से सबसे दूर होने पर 36500 किलोमीटर की दूरी पर है।

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चंद्रयान-3 की कक्षा

चंद्रयान-3 मंगलवार को पृथ्वी की 51,400 x 238 किलोमीटर की कक्षा में पहुंच गया है। 14 जुलाई 2023 को लांच के बाद भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन इसरो ने तीसरी बार कक्षा को बदला इसरो ने बताया कि कक्षा में अगला बदलाव बृहस्पतिवार दोपहर 2:00 से 3:00 के दौरान किया जाएगा। चंद्रयान पृथ्वी की अंडाकार परिक्रमा कर रहा है। फिलहाल चंद्रयान-3 की पेरिजी [पृथ्वी की कक्षा में निकटतम स्थिति] 228 किलोमीटर है और अपोजी [पृथ्वी की कक्षा में दूरस्थ स्थिति] 51,400 किलोमीटर है। चंद्रयान-3 के चंद्रमा तक पहुंचने की प्रक्रिया 40 से ज्यादा दिनों में पूरी होगी।

 

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